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राजसभ, रघु रामसभसीता कान्त कल्याण सभ ।अरिषड्वर्गमुलरयु सभपरमपदम्बुनु ऒसगु सभ ॥ (राजसभ) वेदान्तुलके ज्ञान सभविप्रवरुलके दान सभ ।दुर्जनुलकु विरोधि सभसज्जनुलकु सन्तोष सभ ॥ (राजसभ) सुरलु,...
पल्लविचक्कॆर कलिपिन तिय्यनि कम्मनि तोडु पॆरुगु तॆलुगु,चक्कनि पलुकुल सॊबगुल नडकल हंस होयल बॆडगुनन्नय तिक्कन ऎर्रन पितिकिन आवु पाल पॊदुगुचदुवुल तल्लिकि सुमधुर शैलिकि पुट्टिनिल्लु तॆलुगु ॥च॥...
देशमुनु प्रेमिञ्चुमन्नामञ्चि अन्नदि पॆञ्चुमन्नावट्टि माटलु कट्टिपॆट्टोय्गट्टि मेल् तलपॆट्टवोय् !पाडिपण्टलुपॊङ्गि पॊर्लेदारिलो नुवु पाटु पडवोय्तिण्डि कलिगितॆ कण्ड कलदोय्कण्ड कलवाडेनु मनिषोय् !ईसुरोमनि मनुषुलुण्टेदेश मेगति बागुपडुनोय्जल्डुकॊनि कललॆल्ल नेर्चुकुदेशि सरुकुलु...
ए देशमेगिना ऎन्दु कालॆडिनाए पीठमॆक्किना, ऎव्वरेमनिना,पॊगडरा नी तल्लि भूमि भारतिनि,निलपरा नी जाति निण्डु गौरवमु. ए पूर्व पुण्यमो, ए योग बलमोजनियिञ्चिनाड वी स्वर्गखण्डमुनए मञ्चिपूवुलन् प्रेमिञ्चिनावोनिनु मोचॆ...
पल्लविचक्कॆर कलिपिन तिय्यनि कम्मनि तोडु पॆरुगु तॆलुगु,चक्कनि पलुकुल सॊबगुल नडकल हंस होयल बॆडगुनन्नय तिक्कन ऎर्रन पितिकिन आवु पाल पॊदुगुचदुवुल तल्लिकि सुमधुर शैलिकि पुट्टिनिल्लु तॆलुगु ॥च॥...
प्रकृत्या सुरम्यं विशालं प्रकामंसरित्तारहारैः ललामं निकामम् ।हिमाद्रिर्ललाटे पदे चैव सिन्धुःप्रियं भारतं सर्वदा दर्शनीयम् ॥ 1 ॥ धनानां निधानं धरायां प्रधानंइदं भारतं देवलोकेन तुल्यम् ।यशो यस्य...
सम्पूर्णविश्वरत्नं खलु भारतं स्वकीयम् ।पुष्पं वयं तु सर्वे खलु देश वाटिकेयम् ॥ सर्वोच्च पर्वतो यो गगनस्य भाल चुम्बी ।सः सैनिकः सुवीरः प्रहरी च सः स्वकीयः...
जातिकि ऊपिरि स्वातन्त्र्यं, अदि ज्योतिग वॆलिगे चैतन्यंआ चैतन्यं निलिचिन नाडे समस्त जगतिकि सौभाग्यम् ॥ शिखरंला , प्रति मनिषी, शिरसॆत्तिन नाडे,जलनिधिला प्रति हृदयं अललॆत्तिन नाडे,मानव जीवन...
मन स्वतन्त्र्य भारत केतनमुनॆत्ति नडुवराकटि बिगिञ्चि रिपुधाटिनि काल राचि निलुवरा ॥ आर्धिक समता घण्टिक अल्लदिगो म्रोगॆनुराअन्दरमॊक कुटुम्बमै आनन्दमु कनवलॆरा ॥ मतसमैक्यता निनादमे मनकु बलमुरागतचरित्र तलचि...
पल्लविचक्कॆर कलिपिन तिय्यनि कम्मनि तोडु पॆरुगु तॆलुगु,चक्कनि पलुकुल सॊबगुल नडकल हंस होयल बॆडगुनन्नय तिक्कन ऎर्रन पितिकिन आवु पाल पॊदुगुचदुवुल तल्लिकि सुमधुर शैलिकि पुट्टिनिल्लु तॆलुगु ॥च॥...