जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थलेगलेवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम् ।डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयंचकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम् ॥ 1 ॥ जटाकटाहसम्भ्रमभ्रमन्निलिम्पनिर्झरी–विलोलवीचिवल्लरीविराजमानमूर्धनि ।धगद्धगद्धगज्ज्वलल्ललाटपट्टपावकेकिशोरचन्द्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम ॥ 2 ॥ धराधरेन्द्रनन्दिनीविलासबन्धुबन्धुरस्फुरद्दिगन्तसन्ततिप्रमोदमानमानसे ।कृपाकटाक्षधोरणीनिरुद्धदुर्धरापदिक्वचिद्दिगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि...
शिवो महेश्वर-श्शम्भुः पिनाकी शशिशेखरःवामदेवो विरूपाक्षः कपर्दी नीललोहितः ॥ 1 ॥ शङ्कर-श्शूलपाणिश्च खट्वाङ्गी विष्णुवल्लभःशिपिविष्टोऽम्बिकानाथः श्रीकण्ठो भक्तवत्सलः ॥ 2 ॥ भव-श्शर्व-स्त्रिलोकेशः शितिकण्ठः शिवाप्रियःउग्रः कपाली कामारि रन्धकासुरसूदनः ॥...
नमः शिवाभ्यां नवयौवनाभ्यांपरस्पराश्लिष्टवपुर्धराभ्याम् ।नगेन्द्रकन्यावृषकेतनाभ्यांनमो नमः शङ्करपार्वतीभ्याम् ॥ 1 ॥ नमः शिवाभ्यां सरसोत्सवाभ्यांनमस्कृताभीष्टवरप्रदाभ्याम् ।नारायणेनार्चितपादुकाभ्यांनमो नमः शङ्करपार्वतीभ्याम् ॥ 2 ॥ नमः शिवाभ्यां वृषवाहनाभ्यांविरिञ्चिविष्ण्विन्द्रसुपूजिताभ्याम् ।विभूतिपाटीरविलेपनाभ्यांनमो नमः शङ्करपार्वतीभ्याम् ॥...
पूर्वपीठिका ॥ वासुदेव उवाच ।ततः स प्रयतो भूत्वा मम तात युधिष्ठिर ।प्राञ्जलिः प्राह विप्रर्षिर्नामसङ्ग्रहमादितः ॥ 1 ॥ उपमन्युरुवाच ।ब्रह्मप्रोक्तैरृषिप्रोक्तैर्वेदवेदाङ्गसम्भवैः ।सर्वलोकेषु विख्यातं स्तुत्यं स्तोष्यामि नामभिः ॥...
रत्नैः कल्पितमासनं हिमजलैः स्नानं च दिव्याम्बरंनानारत्न विभूषितं मृगमदा मोदाङ्कितं चन्दनम् ।जाती चम्पक बिल्वपत्र रचितं पुष्पं च धूपं तथादीपं देव दयानिधे पशुपते हृत्कल्पितं गृह्यताम् ॥ 1...
विदिताखिल शास्त्र सुधा जलधेमहितोपनिषत्-कथितार्थ निधे ।हृदये कलये विमलं चरणंभव शङ्कर देशिक मे शरणम् ॥ 1 ॥ करुणा वरुणालय पालय मांभवसागर दुःख विदून हृदम् ।रचयाखिल दर्शन...
देवराज-सेव्यमान-पावनाङ्घ्रि-पङ्कजंव्यालयज्ञ-सूत्रमिन्दु-शेखरं कृपाकरम् ।नारदादि-योगिबृन्द-वन्दितं दिगम्बरंकाशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥ 1 ॥ भानुकोटि-भास्वरं भवब्धितारकं परंनीलकण्ठ-मीप्सितार्ध-दायकं त्रिलोचनम् ।कालकाल-मम्बुजाक्ष-मक्षशूल-मक्षरंकाशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥ 2 ॥ शूलटङ्क-पाशदण्ड-पाणिमादि-कारणंश्यामकाय-मादिदेव-मक्षरं निरामयम् ।भीमविक्रमं प्रभुं विचित्र ताण्डव...
देवराज-सेव्यमान-पावनाङ्घ्रि-पङ्कजंव्यालयज्ञ-सूत्रमिन्दु-शेखरं कृपाकरम् ।नारदादि-योगिबृन्द-वन्दितं दिगम्बरंकाशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥ 1 ॥ भानुकोटि-भास्वरं भवब्धितारकं परंनीलकण्ठ-मीप्सितार्ध-दायकं त्रिलोचनम् ।कालकाल-मम्बुजाक्ष-मक्षशूल-मक्षरंकाशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥ 2 ॥ शूलटङ्क-पाशदण्ड-पाणिमादि-कारणंश्यामकाय-मादिदेव-मक्षरं निरामयम् ।भीमविक्रमं प्रभुं विचित्र ताण्डव...
ॐ शिवाय नमःॐ महेश्वराय नमःॐ शम्भवे नमःॐ पिनाकिने नमःॐ शशिशेखराय नमःॐ वामदेवाय नमःॐ विरूपाक्षाय नमःॐ कपर्दिने नमःॐ नीललोहिताय नमःॐ शङ्कराय नमः (10) ॐ शूलपाणये नमःॐ...
नमामीशमीशान निर्वाणरूपंविभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् ।निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहंचिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ॥ 1 ॥ निराकारमोङ्कारमूलं तुरीयंगिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम् ।करालं महाकालकालं कृपालुंगुणागारसंसारपारं नतोऽहम् ॥ 2 ॥ तुषाराद्रिसङ्काशगौरं गभीरंमनोभूतकोटिप्रभासी शरीरम्...