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ಗಂಗಾ ತರಂಗ ರಮಣೀಯ ಜಟಾ ಕಲಾಪಂಗೌರೀ ನಿರಂತರ ವಿಭೂಷಿತ ವಾಮ ಭಾಗಂನಾರಾಯಣ ಪ್ರಿಯಮನಂಗ ಮದಾಪಹಾರಂವಾರಾಣಸೀ ಪುರಪತಿಂ ಭಜ ವಿಶ್ವನಾಥಮ್ ॥ 1 ॥ ವಾಚಾಮಗೋಚರಮನೇಕ ಗುಣ ಸ್ವರೂಪಂವಾಗೀಶ ವಿಷ್ಣು ಸುರ ಸೇವಿತ ಪಾದ ಪದ್ಮಂವಾಮೇಣ...
గంగా తరంగ రమణీయ జటా కలాపంగౌరీ నిరంతర విభూషిత వామ భాగంనారాయణ ప్రియమనంగ మదాపహారంవారాణసీ పురపతిం భజ విశ్వనాథమ్ ॥ 1 ॥ వాచామగోచరమనేక గుణ స్వరూపంవాగీశ విష్ణు సుర సేవిత పాద పద్మంవామేణ...
गंगा तरंग रमणीय जटा कलापंगौरी निरंतर विभूषित वाम भागंनारायण प्रियमनंग मदापहारंवाराणसी पुरपतिं भज विश्वनाथम् ॥ 1 ॥ वाचामगोचरमनेक गुण स्वरूपंवागीश विष्णु सुर सेवित पाद पद्मंवामेण...
gaṅgā taraṅga ramaṇīya jaṭā kalāpaṃgaurī nirantara vibhūṣita vāma bhāgaṃnārāyaṇa priyamanaṅga madāpahāraṃvārāṇasī purapatiṃ bhaja viśvanātham ॥ 1 ॥ vāchāmagōcharamanēka guṇa svarūpaṃvāgīśa viṣṇu sura sēvita pāda padmaṃvāmēṇa...
চংদ্রশেখর চংদ্রশেখর চংদ্রশেখর পাহিমাম্ ।চংদ্রশেখর চংদ্রশেখর চংদ্রশেখর রক্ষমাম্ ॥ রত্নসানু শরাসনং রজতাদ্রি শৃংগ নিকেতনংশিংজিনীকৃত পন্নগেশ্বর মচ্যুতানল সাযকম্ ।ক্ষিপ্রদগ্দ পুরত্রযং ত্রিদশালযৈ-রভিবংদিতংচংদ্রশেখরমাশ্রযে মম কিং করিষ্যতি বৈ যমঃ...
ଚଂଦ୍ରଶେଖର ଚଂଦ୍ରଶେଖର ଚଂଦ୍ରଶେଖର ପାହିମାମ୍ ।ଚଂଦ୍ରଶେଖର ଚଂଦ୍ରଶେଖର ଚଂଦ୍ରଶେଖର ରକ୍ଷମାମ୍ ॥ ରତ୍ନସାନୁ ଶରାସନଂ ରଜତାଦ୍ରି ଶୃଂଗ ନିକେତନଂଶିଂଜିନୀକୃତ ପନ୍ନଗେଶ୍ଵର ମଚ୍ୟୁତାନଲ ସାୟକମ୍ ।କ୍ଷିପ୍ରଦଗ୍ଦ ପୁରତ୍ରୟଂ ତ୍ରିଦଶାଲୟୈ-ରଭିଵଂଦିତଂଚଂଦ୍ରଶେଖରମାଶ୍ରୟେ ମମ କିଂ କରିଷ୍ୟତି ଵୈ ୟମଃ...
चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर पाहिमाम् ।चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर रक्षमाम् ॥ रत्नसानु शरासनं रजताद्रि शृङ्ग निकेतनंशिञ्जिनीकृत पन्नगेश्वर मच्युतानल सायकम् ।क्षिप्रदग्द पुरत्रयं त्रिदशालयै-रभिवन्दितंचन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः...
चंद्रशेखर चंद्रशेखर चंद्रशेखर पाहिमाम् ।चंद्रशेखर चंद्रशेखर चंद्रशेखर रक्षमाम् ॥ रत्नसानु शरासनं रजताद्रि शृंग निकेतनंशिंजिनीकृत पन्नगेश्वर मच्युतानल सायकम् ।क्षिप्रदग्द पुरत्रयं त्रिदशालयै-रभिवंदितंचंद्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः...
चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर पाहिमाम् ।चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर रक्षमाम् ॥ रत्नसानु शरासनं रजताद्रि शृङ्ग निकेतनंशिञ्जिनीकृत पन्नगेश्वर मच्युतानल सायकम् ।क्षिप्रदग्द पुरत्रयं त्रिदशालयै-रभिवन्दितंचन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः...
चंद्रशेखर चंद्रशेखर चंद्रशेखर पाहिमाम् ।चंद्रशेखर चंद्रशेखर चंद्रशेखर रक्षमाम् ॥ रत्नसानु शरासनं रजताद्रि शृंग निकेतनंशिंजिनीकृत पन्नगेश्वर मच्युतानल सायकम् ।क्षिप्रदग्द पुरत्रयं त्रिदशालयै-रभिवंदितंचंद्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः...