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vandē vandāru mandāramindirānandakandalam ।amandānandasandōha bandhuraṃ sindhurānanam ॥ aṅgaṃ harēḥ pulakabhūṣaṇamāśrayantībhṛṅgāṅganēva mukuḻābharaṇaṃ tamālam ।aṅgīkṛtākhilavibhūtirapāṅgalīlāmāṅgaḻyadāstu mama maṅgaḻadēvatāyāḥ ॥ 1 ॥ mugdhā muhurvidadhatī vadanē murārēḥprēmatrapāpraṇihitāni gatāgatāni ।mālā dṛśōrmadhukarīva...
දේව්යුවාචදේවදේව! මහාදේව! ත්රිකාලජ්ඤ! මහේශ්වර!කරුණාකර දේවේශ! භක්තානුග්රහකාරක! ॥අෂ්ටෝත්තර ශතං ලක්ෂ්ම්යාඃ ශ්රෝතුමිච්ඡාමි තත්ත්වතඃ ॥ ඊශ්වර උවාචදේවි! සාධු මහාභාගේ මහාභාග්ය ප්රදායකම් ।සර්වෛශ්වර්යකරං පුණ්යං සර්වපාප ප්රණාශනම් ॥සර්වදාරිද්ර්ය ශමනං ශ්රවණාද්භුක්ති...
দেব্যুবাচদেবদেব! মহাদেব! ত্রিকালজ্ঞ! মহেশ্বর!করুণাকর দেবেশ! ভক্তানুগ্রহকারক! ॥অষ্টোত্তর শতং লক্ষ্ম্যাঃ শ্রোতুমিচ্ছামি তত্ত্বতঃ ॥ ঈশ্বর উবাচদেবি! সাধু মহাভাগে মহাভাগ্য প্রদাযকম্ ।সর্বৈশ্বর্যকরং পুণ্যং সর্বপাপ প্রণাশনম্ ॥সর্বদারিদ্র্য শমনং শ্রবণাদ্ভুক্তি...
ଦେଵ୍ୟୁଵାଚଦେଵଦେଵ! ମହାଦେଵ! ତ୍ରିକାଲଜ୍ଞ! ମହେଶ୍ଵର!କରୁଣାକର ଦେଵେଶ! ଭକ୍ତାନୁଗ୍ରହକାରକ! ॥ଅଷ୍ଟୋତ୍ତର ଶତଂ ଲକ୍ଷ୍ମ୍ୟାଃ ଶ୍ରୋତୁମିଚ୍ଛାମି ତତ୍ତ୍ଵତଃ ॥ ଈଶ୍ଵର ଉଵାଚଦେଵି! ସାଧୁ ମହାଭାଗେ ମହାଭାଗ୍ୟ ପ୍ରଦାୟକମ୍ ।ସର୍ଵୈଶ୍ଵର୍ୟକରଂ ପୁଣ୍ୟଂ ସର୍ଵପାପ ପ୍ରଣାଶନମ୍ ॥ସର୍ଵଦାରିଦ୍ର୍ୟ ଶମନଂ ଶ୍ରଵଣାଦ୍ଭୁକ୍ତି...
देव्युवाचदेवदेव! महादेव! त्रिकालज्ञ! महेश्वर!करुणाकर देवेश! भक्तानुग्रहकारक! ॥अष्टोत्तर शतं लक्ष्म्याः श्रोतुमिच्छामि तत्त्वतः ॥ ईश्वर उवाचदेवि! साधु महाभागे महाभाग्य प्रदायकम् ।सर्वैश्वर्यकरं पुण्यं सर्वपाप प्रणाशनम् ॥सर्वदारिद्र्य शमनं श्रवणाद्भुक्ति...
देव्युवाचदेवदेव! महादेव! त्रिकालज्ञ! महेश्वर!करुणाकर देवेश! भक्तानुग्रहकारक! ॥अष्टोत्तर शतं लक्ष्म्याः श्रोतुमिच्छामि तत्त्वतः ॥ ईश्वर उवाचदेवि! साधु महाभागे महाभाग्य प्रदायकम् ।सर्वैश्वर्यकरं पुण्यं सर्वपाप प्रणाशनम् ॥सर्वदारिद्र्य शमनं श्रवणाद्भुक्ति...
देव्युवाचदेवदेव! महादेव! त्रिकालज्ञ! महेश्वर!करुणाकर देवेश! भक्तानुग्रहकारक! ॥अष्टोत्तर शतं लक्ष्म्याः श्रोतुमिच्छामि तत्त्वतः ॥ ईश्वर उवाचदेवि! साधु महाभागे महाभाग्य प्रदायकम् ।सर्वैश्वर्यकरं पुण्यं सर्वपाप प्रणाशनम् ॥सर्वदारिद्र्य शमनं श्रवणाद्भुक्ति...
देव्युवाचदेवदेव! महादेव! त्रिकालज्ञ! महेश्वर!करुणाकर देवेश! भक्तानुग्रहकारक! ॥अष्टोत्तर शतं लक्ष्म्याः श्रोतुमिच्छामि तत्त्वतः ॥ ईश्वर उवाचदेवि! साधु महाभागे महाभाग्य प्रदायकम् ।सर्वैश्वर्यकरं पुण्यं सर्वपाप प्रणाशनम् ॥सर्वदारिद्र्य शमनं श्रवणाद्भुक्ति...
தே³வ்யுவாசதே³வதே³வ! மஹாதே³வ! த்ரிகாலஜ்ஞ! மஹேஶ்வர!கருணாகர தே³வேஶ! ப⁴க்தானுக்³ரஹகாரக! ॥அஷ்டோத்தர ஶதம் லக்ஷ்ம்யா: ஶ்ரோதுமிச்சா²மி தத்த்வத: ॥ ஈஶ்வர உவாசதே³வி! ஸாது⁴ மஹாபா⁴கே³ மஹாபா⁴க்³ய ப்ரதா³யகம் ।ஸர்வைஶ்வர்யகரம் புண்யம் ஸர்வபாப ப்ரணாஶனம் ॥ஸர்வதா³ரித்³ர்ய ஶமனம் ஶ்ரவணாத்³பு⁴க்தி...
देव्युवाचदेवदेव! महादेव! त्रिकालज्ञ! महेश्वर!करुणाकर देवेश! भक्तानुग्रहकारक! ॥अष्टोत्तर शतं लक्ष्म्याः श्रोतुमिच्छामि तत्त्वतः ॥ ईश्वर उवाचदेवि! साधु महाभागे महाभाग्य प्रदायकम् ।सर्वैश्वर्यकरं पुण्यं सर्वपाप प्रणाशनम् ॥सर्वदारिद्र्य शमनं श्रवणाद्भुक्ति...